Endolymphatic potential

In this article, we will learn about ‘potential differences’ between different structures of the inner ear and Cochlear microphone potential, and more.

Table of content

1.Introduction
2.Potential differences
3.Cochlear microphone potential and its features
4.Impedance matching
Table of content

Introduction

Interior of the cells of ‘organ of corti’ stria vascularis and other structures in the inner ear are minus 30 millivolts (-30 mV ) to the perilymph present in the scala vestibuli and scala tympani.

There is no potential difference between perilymph present in the scala vestibuli and scala tympani.

The endolymph in the scala vestibule is positive at 80 mV compared with the perilymph in the scala vestibuli and scala tympani.

The potential difference between:

1. Endolymph +80 mV to perilymph

2. Perilymph to perilymph, no potential difference

3. Internal of cell -30 mV to perilymph.

Cochlear microphone potential

Cochlear microphone potential is one of the electrical responses of the cochlea. It is a potential difference between an active electrode placed on or near the cochlea and an indifferent electrode placed on the mastoid process.

The Amplification of cochlear microphone potential by suitable instruments: the loudspeaker records pure tone; this is why it is called cochlear microphone potential.

(Indifferent electrodes may be placed anywhere on the body.)

This potential is like a generation potential.

A few characteristics of Cochlear microphone potential are:

1. Cochlear microphone potentials show no latency or refractory period.

2. Cochlear microphone potentials do not obey ‘all or none law.’

3. Cochlear microphone potentials are resistant to ischemia

4. Cochlear microphone potentials are resistant to anesthesia.

5. Cochlear microphone potential has a linear relationship to the magnitude of the basilar membrane.

6. Cochlear microphone or generation potential converts mechanical energy into electrical energy.

High-frequency sound produces vibration in the basal part of the basilar membrane.

The middle-frequency sound produces vibration in the middle part, while that of low frequency vibrates the apical part of the basilar membrane.

Impedance matching:

Middle ear ossicles magnify sound intensities by 1.2 to 1.3 times.

The effective surface area of the tympanic membrane is about 50-millimeter squares, and that of the oval window is only 3-millimeter squares. This increases pressure within the middle ear and at the oval window by 22 times. This is referred to as ‘impedance matching.’

सावधान ! क्या आप ऊंचे पहाड़ो पर चढ़ने जा रहें है |  

अगर आप ऊंचे पहाड़ो पर चढ़ने जा रहें है तो इन बातों पर खास ध्यान देना बहुत जरूरी है | पहले तो यह जान लें की ऊंचे पहाड़ किसको कहतें है | 

ऊंचे पहाड़ो की श्रेणी में वे ऊंचे पहाड़ है जिनकी ऊचाई समुद्र तल से  कम से कम २५०० मीटर होती है | कुछ विद्वानों के अनुसार यह ऊचाई ३००० मीटर है | 

अगर आप ऊंचे पहाड़ो पर चढ़ने जा रहें है तो इसके लिए आप पहले से प्रोग्राम बनालें | और कुछ विषेश जानकारी प्राप्त करते है | 

१.  प्रशिक्षक  से प्रशिक्षण करें ,पूर्वा अभ्यास कर लें और संतुस्ट होने पर उनके सलाह से अपना प्रोग्राम बनायें | 

२। ऊंचे पहाड़ो पर धीरे धीरे चढ़ना है | कुछ ऊंचाई के बाद रुकना है | जिससे  शरीर उस वातावरण का अभ्यस्त हो सके | इस तरह धीरेधीरे चढ़ना है | 

३. पहाड़ो पर ऊचाई बढ़ने से वातावरण में ऑक्सीजन का दबाब (प्रेशर) कम हो जाता है | और ऑक्सीजन की कमी महसुस हो ती है | अतः ऑक्सीजन का सिलेंडर एवं मास्क रखना आवश्यक है | धीरे धीरे शरीर उस वातावरण का अभ्यस्त होता है | 

४. ऊंचे पहाड़ो पर चढ़ने के बाद तीन दिनों तक शारीरिक श्रम नही करना है ,यह जानलेवा हो सकता है | तीन दिनों के बाद ही हल्का श्रम नही करना चाहिए | 

५. पहाड़ पर उचाई बढ़ने से तापमान में कमी होता है | एक हज़ार मीटर उचाई बढ़ने से ६ डिग्री सेल्सियस के लगभग तापमान में कमी होता है| अतः गर्म कपड़ों का इंतज़ाम रखना जरुरी है | 

अस्वीकरण: 

यह लेख जनता में जागरुकता लाने एवं जानकारी हेतु लिखा गया है | इसके उपयोग के सारी जिम्मेदारी उपयोग कर्ता की होगी| 

इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार विभिन्न लेखों]संचार माध्यमों से लिए गए है और सभी सूचनाएँ मूल रुप से प्रस्तुत की गईं हैSaA व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार नहीं हैं तथा इसके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है|प्रस्तुत किसी जानकारी को इस्तमाल करने से पहले अपने विवेक का इस्तमाल करें | 

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गुरु  गोविन्द  सिंह जयंती २०२ ३ | Guru Gobind Singh Jayanti २०२३  |  

     Keywodrs : त्योहार| पटना | प्रकाश पर्व | गुरु तेग बहादुर | त्योहार| गुरुद्वारा| दार्शानिक | आद्यात्मिक | पांच ककार| धर्म ग्रंथों| लंगर| आद्यात्मिक

Table of contents

1. गुरु  गोविन्द  सिंह जयंती  कब मनाया जाता है

2. गुरु  गोविन्द  सिंह जयंती  कँहा  मनाया जाता है

3. गुरु  गोविन्द  सिंह जयंती का इतिहास        

4.  गुरु  गोविन्द  सिंह जयंती कई नाम

5. गुरु  गोविन्द  सिंह जयंती कैसे मनाया जाता है 

6.  गुरु  गोविन्द  सिंह जयंती  का महत्व 

            गुरु  गोविन्द  सिंह जयंती ,  गुरु  गोविन्द  सिंहजीके  जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है | गुरु  गोविन्द  सिंहजीसिखों के दसवें गुरु हैं | गुरु जी  धर्मरक्षक ,कवि और एक महान योद्धा थे |  वे एक आद्यात्मिक गुरु एवं दार्शानिक थे |  गुरु नानक देव जे ने गुरु ग्रन्थ साहिब को पूर्ण किया |  अपना पूरा जीवन जनता के  लिय  अर्पित कर दिया |

                                     गुरु  गोविन्द  सिंह जयंती कब मनाया जाता है

भारतवर्ष में कई तरह के त्योहार मनाए जाते हैं,गुरु  गोविन्द  सिंह जयंती का त्योहार उनमें बहुत ही महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है  खास करके सिख  भाईयों  के लिए | गुरु  गोविन्द  सिंह जयंती पौष माह के शुक्ल  पक्छ की सत्तमी तिथि मनाया जाता है |आज के ही  दिन १९६६ ईस्वी विक्रम संवत को  गुरु  गोविन्द  सिंह जी का जन्म हुआ था | इसी दिन गुरु  गोविन्द  सिंह जी का प्रकाश पर्व मनाया जा रहा है 

इस वर्ष २०२३   में गुरु  गोविन्द  सिंह जयंती  २७ नवम्बर  को मनाया  जाना है | 

गुरु  गोविन्द  सिंह  का जन्म बिहार राज्य की राजधानी पटना में हुआ था | सिख धर्म के नौवें गुरु तेग बहादुर साहेब के इकलौती संतान थे | इनकी माता का नाम   गुजरी देवी था | बचपन में इनका नाम गोविन्द राय  था |  पटना में इनके जन्म स्थल को अब पटना साहेब कहते हैं | 

जन्म के बाद सिर्फ चार वर्ष तक गुरु पटना में रह पाए | इनके पिता एवं सिखों के नौवें गुरु तेग बहादुर साहेब ने धर्म परिवर्तन करने से इंकार कर दिया जिससे औरंगजेब ने उनका सर कलम करवा दिया | इसके बाद २९ मार्च १६७६ को गुरु गोबिंद सिंह जी को १० वा गुरु घोषित किया गया | इसके बाद से बचपन के गोबिंद राय ,गुरु गोविन्द सिंह जी कहलाने लगे | इस वक्त  गुरु  गोविन्द  सिंह  जी दस वर्ष के थे |

                                          गुरु  गोविन्द  सिंह जयंती कँहा  मनाया जाता है

   गुरु  गोविन्द  सिंह जयंतीविश्व में  सभी जगह मनाई जाती है , खास कर जिस स्थान पर सिख भाई रहतें हैं |  हिंदूओ का भी यह महत्वपूर्ण त्योहार हो जाता है | गुरुद्वारा को सजाया जाता है |इस दिन घर को गुरुद्वारों  को ,फूलों से सजाया जाता है ,दीपक जला कर रौशन करते है |  भक्त जान  गुरुद्वारा में भजन प्रार्थना किया जाता है ,पूजा अर्चना किया जाता है | शांति पूर्वक जुलुस का आयोजन किया जाता है | गुरुद्वारा में लंगर का आयोजन होता है |   

गुरु  गोविन्द  सिंह जयंती को भोजन वस्त्र  इत्यादि दान दिया जाता है | इस दिन किए गए दान पुण्य का बहुत महत्वपूर्ण होता है | 

इस दिन घर को फूलों से सजाया जाता है ,शाम को दीपक जला कर रौशन करते है |  

                                         गुरु  गोविन्द  सिंह जयंती  का महत्व 

 सिखों को  पांच ककार  धारण करने का आदेश  गुरु  गोविन्द  सिंह जी ने दिया ,जिसे धारण करना सभी सिखों के लिए  आवश्यक  है | सिख भाई इसका पालन करते हैं | 

आइए  जानते हैं  कि  वे पांच ककार  क्या हैं : 

१.  बाल -बिना कटे बाल २ कड़ा  कलाई पर पहनने के लिया स्टील या लोहा -धातु का कंगन ३. कच्छा – छोटा जांघिया ४. कृपाण छोटा  तलवार   एवं  ५. कंघा एक लकड़ी का कंघा  हैं | 

गुरु  गोविन्द  सिंह जी के जीवन से हमें बहुत प्रेरणा मिलती है | जैसे कि::

 कोई भी परिस्थिति  हो हिम्मत नहीं हारना है ,और कड़ी  मेहनत करना चाहिए| 

धर्म ग्रंथों का आदर करना एवं पढ़ना सुनना चाहिए

धर्म के अनुरूप आचरण करना चाहिए| 

धर्म के रक्षा हर हाल में करना चाहिए| धर्म के रक्षा में जान की भी प्रवाह नहीं करना चाहिए |  

वर्तमान पर ध्यान दे और भविष्य निर्माण का योजना पर काम करना चाहिए | 

यथा संभव जरूरतमंद एवं गरीबों के सहायता करना चाहिए

गुरु  गोविन्द  सिंह जी का आदेश है की अपनी कमाई का दसवां भाग दान करें |  

गुरु  के उपदेश  बहुत ही पवित्र  है | गुरु ग्रन्थ सिखों का सबसे पवित्र ग्रन्थ हैं | भारतवर्ष  एवं अन्य कई देशों के  जन- जन, कन -कन  में गुरु  गोविन्द  सिंह जी  रचे बसें हैं | हर वर्ष गुरु  गोविन्द  सिंह जयंती में गुरु  गोविन्द  सिंह जी  के ज्ञान पर  आधारित व्याख्यान  का आयोजन कई जगहों में  किया जाता है जिससे गुरु  गोविन्द  सिंह जी के विचार का  ज्ञान प्राप्त होता है|  | गुरु  गोविन्द  सिंह जी के बिना भारतवर्ष की कल्पना नहीं की जा सकती है | गुरु  गोविन्द  सिंह जी हर नागरिक  के लिए  एक आदर्श हैं | 

चलिए हमलोग गुरु  गोविन्द  सिंह जी जयंती मनाते है | गुरु  गोविन्द  सिंह जयंती सब को मुबारक हो |

                         गुरु  गोविन्द  सिंह जयंती की हार्दिक बधाई | 

आपने किस तरह से गुरु  गोविन्द  सिंह जयंती  मनाई कमेंट कर मुझे बताये | अपने अमूल्य विचार से अवगत कराना न भूलें  | 

    धन्यबाद 

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इन्हें भी देखें  

https://knowledge-festival.blogspot.com/2022/05/janki-navami.html

https://knowledge-festival.blogspot.com/2022/04/2022-hanuman-janmotsav-2022.html

Oxidation-Reduction | Redox| Physiology

Before discussing antioxidants in detail, let’s define oxidation so we can understand it clearly.

Keywords: Human Physiology |General |Wellbeing| Self study| Cytochrome c oxidase |Flavoprotein—cytochrome system| Redox

  1. Introduction
  2. Oxidation
  3. Reduction
  4. Anerobic oxidation
  5. Oxidation reactions that utilize oxygen:
    1. 1. Oxidation of phospho glyceraldehyde:
    2. 2. Oxidative decarboxylation:

Introduction

Oxidation and reduction go hand in hand; oxidation of one substance causes reduction of another. When one substance is oxidized, another substance gets reduced. We will learn oxidation and reduction in human physiology.

Oxidation

Oxidation is the addition of oxygen to a substrate or removing hydrogen or electrons from a substance.

Oxidation = substrate + oxygen

= substrate – hydrogen

= substrate – electron.

It is clear from its definition that oxygen is not essential for oxidation. Agree.

Reduction

Reduction is the removal of oxygen from a substrate or adding hydrogen or an electron to a substrate.

Reduction=substrate – oxygen

= substrate +hydrogen

= substrate + electron

In reduction, oxygen is not essential. Clear.

Anerobic oxidation

Dehydrogenation reaction is the removal of hydrogen from a substance, and this is common biological oxidation. Oxygen is not utilized; therefore, it is known as ‘Anerobic oxidation”.

Coenzyme S2 -2H

S-OH àS=O+2Hà

Coenzyme2H S2

S is oxidized, while S2 is reduced.

When a coenzyme accepts 2H, it gets reduced. The coenzyme transfers its hydrogen to another substance, say S2. Now, S2 is reduced.

NAD( nicotinamide adenine dinucleotide) and NADP (nicotinamide adenine dinucleotide phosphate) are essential coenzymes; they accept hydrogen and get reduced.

Nicotinamide is a member of the B-complex vitamins. It is not synthesized in the human body and must be obtained from the diet.

Oxidation reactions that utilize oxygen:

1. Oxidation of phospho glyceraldehyde:

Oxidation

Phosphoglyceraldehyde Phosphoglyceric acid

It is a crucial step during glucose metabolism.

2. Oxidative decarboxylation:

Pyruvic acid –> ketoacid Acetyl CoA+ CO2

ATP is the energy coin of the cell. Cells use ATP during their activities and active processes. But cells can’t store ATP in large amounts. So, cells form ATP continuously.

ADP <==> ATP

Energy is transferred to ADP to form ATP. ATP provides its energy to the cell and becomes ADP.

ADP + inorganic phosphate àATP

Oxygen is required in this process. This is the primary process that forms ATP.

In another method, the phosphate group is added to ADP by the metabolic process; oxygen is not required.

In the mitochondria, ‘Respiratory chain oxidation’ or Oxidative phosphorylation occurs. Oxidation occurs by the ‘Flavoprotein—cytochrome system’ to form ATP. The ‘Flavoprotein—cytochrome system’ is a chain of enzymes that transfers hydrogen to oxygen to yield water.

At rest, 90% oxygen is consumed in the mitochondria to form ATP.

Respiratory chain oxidation consists of multiple enzymes. Each enzyme in the chain is reduced and reoxidized as the hydrogen is transferred to other enzymes. The hydrogen liberated from various substrates by dehydrogenase temporarily combines with coenzymes, such as NAD, NADP, and FAD.

Finally, the hydrogen is transferred to molecular oxygen to form water. The coenzyme is regenerated and becomes available for the following reaction. The final enzyme in the Respiratory chain oxidation is “cytochrome c oxidase.”

NAD.2H + ½ OxygenàNAD+ H2O + 3ATP

(several steps are involved).

FAD+ Cytochrome + Cytochrome c oxidase= ‘Flavoprotein -cytochrome system.”

The site of this reaction is the inner membrane of the mitochondria.

The coenzymes and flavin are reduced by adding two hydrogen atoms, while iron-containing cytochromes are reduced by electron transfer.

During the dehydrogenation reaction, a hydrogen atom is removed and undergoes acidic ionization to produce a proton (+v charge H+) and an electron(e—).

H < ==>H+ + e-

The total energy released during electron transport along the respiratory chain oxidation – is 40% ATP and 60% heat.

The cell fails to form ATP if oxygen is unavailable to the ‘Flavoprotein -cytochrome system.’

Redox

Redox was first used in 1928 (6) and is a portmanteau of reduction and oxidation. The process of oxidation is always accompanied by reduction. The two processes co-occur.

The oxidation is a half-reaction. Reduction is also a half-reaction. The two half-reactions occur together on every occasion to constitute a whole reaction.

When a reducing agent (reductant) loses electrons, it is oxidized, and the oxidizing agent(oxidant) gains electrons and is reduced.

A redox pair involves reducing and oxidizing agents engaged in a specific reaction.

FAQs:

Q1.Name few oxidizing agents.

A. Oxygen gas, halogens are few oxidizing agents to quote.

Q2.Name few reducing agents.

A. Hydrogen, oxalic acid and many reducing agents in our bodies.

Let us know your opinion

         Free Radicals

1.Introduction
2.Formation of free radicals
3.Common free radicals
4.Factors for the formation of the free radicals
5.Mode of action
Table of contents

Table of contents

Introduction: Free radicals exist independently with only one electron in one or more orbits. Such a lone electron is known as an unpaired electron. Usually, normal molecules have electrons in pairs for electrical normality.

They are very reactive molecules or substances in the body. When a free radical reacts with a molecule, it forms or generates another free radical.

Formation of free radicals: During metabolic processes, oxygen converts food into energy. Electrons are released from the oxygen atom. The free radicals are formed principally from oxidative food products. When we eat more, more free radicals are formed.

Electrons are removed from the oxygen atoms, one electron at a time. When one electron is removed from an oxygen atom, the oxygen atom with an unpaired electron-free radical is generated.

The extra electron is very reactive and initiates a chain of reactions, producing thousands of free radicals. Endogenous and exogenous antioxidants balance free radicals. But when free radicals are generated rapidly, and antioxidants are less, free radicals accumulate in our body. Excess-free radicals produce toxic, harmful effects, which cause several diseases -even carcinoma and may be lethal.

On average, free radicals have protective actions that help in immunity.

Common free radicals in our bodies are:

Oxygen molecules, hydrogen atoms, superoxide anion, nitric oxide, and hydroxyl ions.

Hydroxyl ions are very damaging radicles.

Factors responsible for excess free radicals formation:

  • Excessive food intake
  • Less vitamin intake
  • Stress
  • Extreme of emotions
  • Pollution
  • Smoking
  • Alcohol excess
  • Excessive exposure to sunlight-ultra violet light
  • Radiation
  • Lack of exercise.

Diseases due to excess free radicals are numerous. I would like a few to mention:

Carcinoma of any organ, heart disease, arthritis, cataracts, autoimmune diseases, retinopathy, Parkinson’s disease, and much more.

Mode of action:

  1. Free radicals may fuse protein molecules so that their normal functions are lost. The free radicles damage proteins.
  2. Free radicals damage the cell membrane, causing dysfunction of cell membranes, and cell death may occur.
  3. Free radicals are responsible for aging.
  4. Free radicals cause the oxidation of fatty compounds-hormones to disturb the body’s normal functioning.
  5. Free radicals enter the nucleus, damaging ribosomes and other nuclear organelle.
  6. DNA damage may cause mutation and cancers.

How to reduce excess free radical formation:

  • Reduce excessive food intake. Eat a balanced diet only to maintain a normal BMI.
  • Consume an adequate amount of vitamins -especially Vitamins E, C,
  • Avoid stress and extreme emotions
  • Avoid pollution
  • Avoid Smoking 
  • Avoid Alcohol excess
  • Avoid Excessive exposure to sunlight-ultra violet light
  • Avoid Radiation
  • Do regular exercise for 30 minutes.
  • Healthy lifestyle: proper sleep, healthy foods, and exercise.

In this way, we may counteract the harmful effects of free radicals and enjoy a healthy life.

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Thank you for reading.

कम बोलें | शांत रहने के फायदे 

ज्यादातर लोग अपने विषय में बहुत बोलते है | बोलना उन्हें अच्छा लगता है | अपने अतीत के विषय में बात करते है ,उन्होंने कैसे कैसे परेशानी का सामना किया ,किस तरह अपनों नें धोखा दिया ,इत्यादि इत्यादि | और किस तरह उन्होंने  अपने को संभाला | अपने को महिमा मंडित करते है | उनको हमेशा दूसरों से शिकायत रहती है | वास्तव में उनमे आत्मविस्वास की कमी होती है | 

“Speech is silver, silence is golden” is a proverb highlighting the importance of silence over speech.

अपने समस्याओं के विषय में बात करने से ,अपने परिस्थति  के लिए दूसरों पर दोषारोपण करने से नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है | इससे परिस्थति और खराब होती है | श्री रहीम ने कहा है

         ” रहिमन निज मन की ब्यथा ,मन ही  राखो गोय | 

            सुनि  अठलहियें लोग सब ,बाँटे न लैहैं  कोए || “

इसका मतलब ये है की अपने मन की दुःख ,दर्द,परेशानी को अपने तक ,अपने दिल में रखना चाहिए ,दूसरों को बताने से कोई इसका समाधान नहीं करेगा ,और आपके दुःख को जानकर मन ही मन खुश होगा | अतः अपने मन की दुःख ,दर्द,परेशानी ,कमजोरी को किसी के सामने प्रकट नहीं करना चाहिए | यह आज भी प्रासंगिक है | 

ज्यादा बोलकर उन्हें लगता है की वे सुनने वाले उनसे प्रभावित होते हैं | उनमें दिलचस्पी ले रहें हैं | परन्तु वास्तविकता इसके विपरीत होता है| सुनने वाले सुनने का दिखावा करते हैं ,और आपसे छुटकारा प्राप्त करने का वहाना तलाश करते रहते है | किस प्रकार आपसे छुटकारा मिले | और अगली बार अगर मुलाकात हो जाती है तो वो आपसे किनारा कर लेंगे। आपके बगल से निकल जाएंगे जैसे आपको जानते  ही नहीं है | 

वास्तव में आपमें और आपके समस्या में किसी को कोई दिलचस्पी नहीं होती है | उनके पास खुद के बहुत सारी समस्या है ,उन समस्याओं के समाधान में व्यस्त होते है ,वे अपने समस्याओं से घिरे होते है | आप ने क्या किया ,क्या नही किया इससे उनको कोई मतलब नही होता है | 

इसका उपाय समाधान  क्या है | 

इसका समाधान है कम बोलिए ,जितना जरुरत हो उससे भी कम बोलिए | और खास कर अपने विषय में तो बात ही न करें | अगर कोई पूछता नहीं है तो मैं अपने बारे में नहीं बताता हूँ और  क्यों बताऊं | मेरे कर्म से लोग मेरा परिचय प्राप्त करेंगे | 

कम बोलिए ,जितना जरुरत हो उससे भी कम बोलिए| जब आप कम बोलते है ,तो आपको अपने शब्दों का चुनाव करने में सजग रहना होगा | इससे आपके शब्दों  का वजन बढ़ेगा ,आपका महत्त्व बढ़ेगा | लोग आपको सुनना पसंद करेंगे | 

कम बोलने  का एक फायदा है की ,कम बोलने से आप अपने मन की दुःख ,दर्द,परेशानी ,कमजोरी को किसी के सामने प्रकट नहीं कर सकेगें  | दूसरों की शिकायत नहीं कर पायेंगे | 

अपने विषय में तो बात ही न करें |अगर आप चुप रहेंगे अपने विषय में कम से कम बतायेंगे लोग आप के बारे में जानना चाहेंगे | आप अपने को एक रहस्यमय व्यक्ति  बना कर रखें ,जिससे आप के बारे में जानना चाहेंगे |लोगो को रहस्य पसंद होता है और रहस्य से पर्दा हटाने की कोशिस करतें है | आप इतना चुप क्यों रहते है इसका रहस्य जानना चाहते है ,कुछ अचंभित करने वाले सूचना  जानना चाहेंगे | इसके बाद वे आपके बारे में बात करेंगे | 

कम बोलने  का एक फायदा  यह भी है की आप ज्यादा सुनते है | आज के समय जब कोई किसी की नहीं सुनता है उस समय जब आप सुनते हैं तो लोग आपके पास आते है | अपने समस्या ,अपनी परेशानीओं को सुनाते हैं | इससे आपका महत्ब बढ़ जाता है | 

हम सभी जानते है की  हर व्यक्ति  के पास दो कान और एक जीभ होता है | कहा गया है की इसका मतलब है ज्यादा सुनना और काम बोलना | इसलिए आप ज्यादा सुनते की आदत विकसित करें | 

Photo by Sound On on Pexels.com

मै जानता हूँ  शुरु शुरु में चुप रहना और उससे भी ज्यादा किसी का वकवास ध्यान से ( झूठा ही सही ) सुनना कितना कस्टप्रद है,परन्तु सफलता के लिए खुश रहने के लिए  इतना तो  सहना पड़ेगा | धीरे धीरे इसकी आदत लग जाने से तकलीफ नहीं होता है ,और मजा आने लगता है | 

 तो आइए आज और अभी से अपने आप से एक वादा करें की कम बोलेगे ,जितना जरुरत हो उससे भी कम बोलेगे| और खास कर अपने विषय में तो बात ही न करेगें | और ज्यादा सुनेगें | 

आपने इतना वक्त मेरे साथ व्यतीत किया इसके लिए आपका दिल से धन्यवाद | 

जल्द ही मिलते है ,इसी तरह के लेख के साथ ,तब तक अपना ख्याल रखिए | 

अस्वीकरण :  
इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार विभिन्न लेखों संचार माध्यमों से लिए गए है और सभी सूचनाएँ मूल रुप से प्रस्तुत की गईं है| व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार नहीं हैं तथा इसके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है मानवीय भूल  टंकण भूल भी हो सकता है इसके लिए लेखक किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है |

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       सफलता  में रुकावटें 

किसी  को सफलता रातों रात और एकाएक नहीं मिलता है | कभी कभी देखने में लगता है कि कोई रातों रात सफल हो गया -स्टार बन गया | परन्तु ऐसा नही है | सफलता के पीछे धीरज और लगन से लगातार किया गया मेहनत होता है | धैर्य और लगन से लगातार धीरे धीरे किए गए कार्य से,परिश्रम से सफलता मिलती है | कोई शॉर्टकट नहीं है | 

साधरणतः लोग सफल नहीं हो पाते है ,क्यू कि उनको अपना लक्ष पता नही होता है | जब ठीक से लक्ष ,मंजिल नही मालूम होगा तो सफलता मिलेगी केसे | 

कुछ लोगों को अपना लक्छ तो मालूम होता है परन्तु वे बहुत जल्दी परिणाम पाना चाहतें है जो असंभब है | तुरंत परिणाम नहीं मिलने से वे ऊब कर अपना नया लक्ष खोज कर उस पर मेहनत करते है |फिर वही कहानी दुहराते है|  

हमारे हर दिनों के अच्छी आदतों से हमारे जीवन का जीने का गुणवत्ता बढ़ती है | गुणवत्ता अच्छी आदतों से कोई भी लक्ष प्राप्त होती है | अच्छे गुण अच्छी आदतों के कारण लक्ष के और धीरे धीरे ही सही, प्राप्त करने के और बढ़ते है | हमलोग अच्छे गुण अच्छी आदतों के बारे में जानना चाहते है ,और अपनाना चाहते है ,| 

परन्तु बुरे गुणों ( नेगटिव विचार ) के विषय में जानकारी नहीं रखते है | इस लेख में आज कुछ बुरे गुणों ( नेगटिव विचार ) के विषय में जानकारी प्राप्त करेंगे | 

  • सभी को हाँ कहना: हर कोई आपसे अपना काम करवाना चाहते है| अपना मतलब साधना चाहते है| और आप अपना रिश्ता ,दोस्ती निवाहने के कोशिश उनके बात मान लेते है | उनके काम करने के  कारण आप अपने काम पर पूरा ध्यान नहीं दे पाते  है | आपका काम पूरा नहीं होता है जिससे काम का बोझ बढ़ता जाता है | आप ज्यादा समय तक काम करते है ,मानसिक एवं शाररिक स्वास्थय  पर असर होता है | मानसिक अवसाद के शिकार हो जाते है | उस वक्त कोई आपको नहीं पूछता है |
  •  इस लिए ना कहने की आदत डालिये | शालीनता से मना कर दे ,एक दो बार के बाद वे समझ जायेगे और आप से अपने काम करने  के बारे में नहीं कहेगे |  हो सकता है आपसे नाता तोड़ ले ,परन्तु इससे आपके सेहत पर अच्छा प्रभाव होगा | 
  • अपने स्वास्थय को प्रमुखता न देना : हम लोग अपने स्वास्थय  पर ध्यान नही देते है,सिर्फ काम पर ध्यान रहता है | इस दुनिया में जिन्दा रहने और  दुसरो से आगे होने के ललक में हम अपने स्वास्थय को  भूल जाते है | न खाने का समय न सोने का | इससे धीरे धीरे कई बिमारियाँ हमें जकड़  लेते हैं ,उदहारण के लिए उक्त रक्तचाप,चीनी की बीमारी हो जाता है | मानसिक तनाव, से अवसाद हो जाता है | कार्य करने के छमता घट जाती है गुणवत्ता काम जाती है | 
  • अपने स्वास्थय को प्रमुखता दें   इसके लिए मैं कुछ बातें कहना चाहता हु,इसके विषय में कई लेख आपने पढ़े होंगे | अनुरोध है कि कुछ पर ध्यान देने एवं अमल में लाने की कोशिस जरूर करें | | अपने स्वास्थय को प्रमुखता देने के लिए 
  • सुबह उठ जाना सूर्योदय के पहले 
  • योग्याभ्यास 
  • व्यायाम करना 
  • पौस्टिक एवं संतुलित समय पर आहार 
  • भरपूर गहरी निंद 
  • परिवार और मित्रों के साथ समय गुजारना |  

इससे कार्य शैली और  गुणवत्ता में सुधार होगा | 

कई काम एक साथ करना : इस समय हमें बहुत काम करने होते है ,एवं जल्दी करना होता है ,जिसके कारण एक वक्त में  कई काम करना होता है | यह बहुत गलत है | एक साथ कई काम करने से मानसिक एवं शारीरिक थकन होता है जिससे कार्य प्रभावित होता है | 

इसके लिए प्रमुख काम को पहले करे ,उसके बाद के महत्ब्पूर्ण काम को पूर्ण करे | इस लिए एक वक्त में एक काम पर पूरा ध्यान दे कर काम करे ,उसके बाद  ही दूसरे काम को हाथ में लें | 

किसी से अपनी तुलना करना  :  किसी से अपनी तुलना करने के गंदी आदत तुरंत छोड़ दें | हर आदमी अलग है ,हर आदमी की जरुरत अलग है | अगर आप संतुस्ट एवं खुश रहना चाहते है तो किसी से अपनी तुलना न करें | 

हमेशा सही और पूर्ण होने की इच्छा : हमेशा हमेशा सही और पूर्ण होने की इच्छा परेशानी का बहुत बड़ा कारण है | आप हर वक्त सही नही हो सकते हैं ,यह देखने बाले पर निर्भर करता है | गलती सबसे होती है ,परन्तु उस गलती को दुबारा नहीं किया जाना आपको सफलता के और ले जाता है | गलती होने पर उसे मान लेना चाहिय | तनाव नहीं लेने का | कोई भी पूर्ण एवं सही नही है | आप भी औरों की तरह ही  है | 

दूसरे में दोष निकालना : दूसरे में दोष निकालने एवं दूसरे की शिकायत करने के आदत भी अहम सफल नहीं होने देती है ,अतः इस को तुरंत छोड़ देना है | 

शांत मन से विचार करने पर उम्मीद है की आप मेरे आलेख से सहमत होगें | आप अपने विचार और सुझाब भेजें ,जिससे इस तरह के आलेख में सुधार हो सके | 

                                                       आलेख पढ़ने के लिए दिल से धन्यवाद | 

  

     

क्या आप खरीदारी करने जा रहें है

क्या आप खरीदारी करने जा रहें है

  क्या आप खरीदारी करने जा रहें है ,अगर हां तो रुकिए जरा सोचिए आप क्या खरीदना चाह रहे है ,और उसका आप के लिए क्या उपयोग है | अगर आ ख़रीदने जा रहें तो अच्छा लें जो कुछ वर्षो तक चले | उदाहरण के लिए  अगर जैकेट लेना है तो ऐसा ले जो कुछ साल चले , महगा  हो तो हो | सस्ता लेने से हर साल खरीदना न हो | जो भी लेना है अपने पसंद से अपने जरुरत के अनुसार |  |  

 हम लोग  बहुत ज्यादा खरीदारी करते है | जिस सामान का जरुरत नहीं भी है वो भी खरीद लेते है | खरीदारी बिना सोचे समझे  देखा देखी में खरीद लेते है | मॅहगा सामान और ज्यादा समान खरीदना इज्जत की बात समझी जाती है | यह सामाजिक प्रतिष्ठा का पैमाना है | हम जरुरत के लिए नहीं , दिखावे के लिए खरीदते है | इस बात को ठीक से  समझना जरुरी है |  

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कपड़ो के बात करें तो आलमीरा में नया नया ड्रेस भरा रहता है ,रखने का जगह नहीं है फिर भी नया ड्रेस लेते है | शायद ही एक दो बार पहन ते है | दूसरे को दिखाने के लिया जाता है | आलमीरा क्या पूरा घर अव्यवस्थ हो जाता है | इस अव्यवस्था से हमारा दिल दिमाग एवं  मन भी अस्त वस्त हो जाता है ,चिंता और तनाब हो जाता है | हम अपने काम पर  ध्यान नहीं दे पाते है |  सभी पुराने कपड़ों एवं अन्य सामान संजो कर रखते है की कभी काम आ सकता है ,परन्तु कभी काम नहीं आता है और घर के एक बहुत बड़े भाग को घेरे रहते है | जिससे कई तरह के समस्या उत्पन होते है |  

एक और उदाहरण से इसे जानते है | मोबइल फोन के विषय में बात करते है | मोबाइल बनाने बाली कंपनी कुछ कुछ दिनों पर नया नया मोबाइल  नए फीचर -गुणों के साथ बाजार बाजार में ऊँचे दामों पैर लाती है | लोगो को लुभाती है | दुकानदार एवं बैंक से इनका साठ गांठ होता है | अगर आपके पास रकम नहीं है तो ऐ तुरंत कर्ज देने को तैयार रहते है | और आप कर्ज से नया मोबाइल खरीद लेते है | इस  मोबाइल के नए फीचर का आप इस्तमाल नहीं कर पाते है ,क्यू की आप को उसकी जरूरत नही है | बड़े मोबाइल से ,महेंगे मोबाइल से आपके  प्रतिष्ठा में चार चाँद लग जाता है | आप इसे अपने परिचित को दिखाते है ,तो वे भी इससे  महेंगे मोबाइल कर्ज पर  ही  सही खरीद लेते है |  इसके बाद क्या होता है ,आप कर्ज के कुचक्र में पर जाते है ,जल में फंस जाते है ,और कर्ज के क़िस्त चुकाने का चिंता होता है | जितना महॅगा मोबाइल  उतना बड़ा आदमी | यह कर्ज पूरा भी नहीं होता है की फिर से बाजार में नया मोबाइल और नए फीचर के साथ उपलब्ध हो जाता है | आप को कम्पनी से खबर आती है की आप उसके माननीय ग्राहक है ,इस लिए आपको सबसे पहले यह सूचना दी जा रही है और आपको इस दाम पर रियायत दे जाएगी | आप बाजार के जाल में फस जाते है और कर्ज से नया मोबाइल खरीद लेते है फिर से कर्ज से नया मोबाइल खरीद लेते है | पुनः  कहानी दोहरायी जाती  है | चिंता बढ़ती है | जितना महॅगा मोबाइल  उतना बड़ा आदमी |  

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अपने पुराने सामान को चेरेटी में किसी जरुरतमंद को नही दे पाते है |  

मैं नही कहता की आप खरीदारी न करें | परन्तु खरीदारी अपने जरुरत के लिये सोच समझ  कर करें| दूसरे को देख कर और बाजार एवं दुकानदार के लुभावने स्कीम को देखकर नही करे | आप कर्ज के कुचक्र में न फंसे |  

हम सभी चिंता मुक्त जीवन जीना चाहते है परन्तु खुद उलझन खरीद लाते है | और उस उलझन को सुलझाने में अपना जीवन बर्वाद करते है | हम सभी चिंता मुक्त सकूँन की जीवन जीना चाहते है | अपना मानसिक स्तर ऊंचा ले जाना चाहते है ,परन्तु सभी उपाए ऐसे करते है के कभी सकुन से नही रह पाते है | जितना कम समान उतना मानसिक शांति होगा |  

लेख पढ़ने के लिए आभार | अपना सुझाब हमें जरुर दें ,इससे लेख में सुधार करने में मदद होते है | मुझे प्रेरणा प्राप्त होता है | अगले लेख में फिर मिलते है |  

अगर आप को लेख अच्छा लगा तो शेयर एवं  फॉलो  करें | अपने विचारो से कमेंट्री बॉक्स में लिख कर मुझे जरूर बताएं | धन्यबाद |  

महाविद्या  के महादेवियाँ  

प्रस्तावना: भारत पर्वों का देश है ,यहाँ कई देवी देवताओं की पूजा अर्चना बहुत उत्साह से किया जाता है | इस लेख में हम दस महादेवियाँ के नाम जानेंगे | 

पौराणिक मान्यतों के अनुसार दस महादेवियाँ हैं ,जो अजर अमर हैं | सच्चे मन से इनके पूजा उपासना करने से बहुत विद्याएँ प्राप्त होती है | सुख सम्पति प्राप्त होता है मनोकामना पूर्ण होता है | इन महादेवियाँ की मृत्यु नहीं हो सकती है | इनके नाम निम्नलिखित है : 

  • माँ तारा 
  • माँ त्रिपुर सुंदरी 
  • माँ भुबनेश्वरी         
  • माँ छिन्मस्तिका 
  • माँ काली 
  • माँ त्रिपुर भैरवी 
  • माँ धूमावती 
  • माँ बंगलमुखी 
  • माँ मातंगी 
  • माँ कमला 

 अस्वीकरण:  इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार विभिन्न लेखों]संचार माध्यमों से लिए गए है और सभी सूचनाएँ मूल रुप से प्रस्तुत की गईं हैSaA व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार नहीं हैं तथा इसके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है|किसी भी जानकारी या मान्यता को इस्तेमाल करने से पूर्व सम्बंधित विशेषज्ञ की राय प्राप्त कर लें | 
Tags :  धर्म | आस्था | हिन्दू मंदिर | देवी | देवता | भारत | 

माँ छिन्मस्तिका मंदिर रजरप्पा 

निपाह वायरस 

इस लेख में हम लोग निफा या निपाह वायरस Nipah virus  के विषय  में  होने वाली आवश्यक जानकारी प्राप्त करेंगे | इसके विषय की  जानकारी रहने पर हम लोग अपने को एवं अन्य लोगों की जान बचा  सकते है | 

Key word Nipah virus | wellness | wellbeing  |  protection |selfcare|  health care | social science | positivity | WHO| Bats | domestic animals|  

TABLE OF CONTENT :

1  Nipah virus  का परिचय  

2  Nipah virus  कैसे फैलता है 

3  Nipah virus होने पर लक्छण 

4  Nipah virus से बचाव 

5. Nipah virus से सावधानी 

6  Nipah virus  का उपचार  

परिचय 

निफा या निपाह वायरस फ्रूट चमगादड़ में होता है और पशुओं संक्रमित करत है |

 निफा वायरस संक्रमित पशुओं के ऊतक] रक्त]  लार] मूत्र एवं साँस का ड्रॉपलेट से मनुस्यों में संक्रमण होता है |  इसके बाद संक्रमित व्यक्ति के घनिष्ठ संसर्ग में आने वाले मनुष्यो को साँस का ड्रॉपलेट से संक्रमण होता है |मनुष्यो का ऊतक]   रक्त  मूत्र भी संक्रमित करत| है |

संक्रमण के तरीके 

संक्रमित फ्रूट चमगादड़ के सीधे सम्पर्क में आने से 

संक्रमित फ्रूट चमगादड़ के रक्त]लार या मूत्र के संपर्क में आने वाले फल या अन्य खाद्य सामग्री का  किसी तरह से सेवन करने से उदाहरण के लिए पाम सैप या कोई बिना धोये ताजा फल 

संक्रमित पशुओं  के रक्त,लार या मूत्र के संपर्क में आने से 

संक्रमित मनुष्यो के घनिष्ठ संसर्ग में आने वाले मनुष्यो को साँस का ड्रॉपलेट से संक्रमण होता है ा मनुष्यो का ऊतक] रक्त ] लार ] मूत्र भी संक्रमित करता है

जानवरों में निफा वायरस बहुत तेजी से फैलता है

इतिहास 

सबसे पहले  १९९९ में मलेसिआ और सिंगापूर के  एपेडमिक में इस निफा वायरस का खोज हुआ था | इस के खोज से पता चला कि फ्रूट चमगादड़ से यह निफा वायरस सूअर में आया ,और पिग फार्म में काम  करने वालों को संक्रमित किया | इसके बाद यह मलेसिआ और सिंगापूर में विस्फोटक रूप से फैल गया | इस बीमारी को रोकने के लिए   लाखों पिग्स को मारना पड़ा था | इस के बाद उन देशों में यह बीमारी फिर से नही हुआ | 

परन्तु यह बांग्लादेश एवं भारत में हर साल होता है | और कभी भी विस्फोटक रूप ले सकता है | 

लक्छण 

निफा वायरस बिना किसी लक्छण के हो सकता है और ठीक हो जाता है | इस कारण उस व्यक्ति का पूरा चिकत्सीय ब्यौरा लेकर उसके यात्रा विवरणी को देखते हुए और कँहा का निवासी है इस बीमारी का संदेह करते हुए आगे जांच किया जाता है |

इस बीमारी के कोई खास लक्छण नहीं होता है और कई बीमारी में हो सकते है | ये लक्छण साधारण से गंभीर हो सकते है |

 साधारण लक्छण 

सिरदर्द बुखार सुस्ती मांसपेशिओं में दर्द उलटी गले में खरास खांसी इत्यादि हो सकता है |

गंभीर लक्छण 

सॉस लेने में दिक्तत नेमोनिआ ज्यादा सुस्ती बेहोशी चमकी आना एवं मस्तिष्क के सूजन के अन्य लक्छण दिखाई पड़ते है|

निदान डायग्नोसिस 

निफा वायरस बीमारी के कोई खास लक्छण नहीं होता है जिसके कारण इसके डायग्नोसिस में कठिनाई होती है परन्तु व्यक्ति का पूरा चिकत्सीय ब्यौरा लेकर उसके यात्रा विवरणी को देखते हुए और कँहा का निवासी है इस बीमारी का संभावना एवं संदेह करते हुए आगे जांच किया जाता है |

खास विशिस्ट जाँच शरीर के स्त्राव जैसे कि रक्त मूत्र लार- से 

आर टी -पी सी आर रियल टाइम पोलीमेरसे चेन रिएक्शन – 

एलिसा टेस्ट एंजाइम लिंकेड इम्मुनो अब्सॉर्बेंट ऐसे 

पी सी आर पोलीमेरसे चेन रिएक्शन

वायरस आइसोलेशन वाय सेल कल्चर -पक्का सबूत प्रदान करता है 

इलाज 

निफा वायरस बीमारी के कोई खास इलाज नही है कोई खास दबाई नहीं है  लक्छण के अनुसार इलाज किया जाता है |

आराम करना – पूरा पोस्टिक खाना एवं तरल पदार्थ का सेवन करना| 

मरीज को लक्छण रहने तक अलग रखना |

वचाव 

कोई खास वैक्सीन उपलब्ध नहीं है अतः बचाव के सारे उपाय करना एवं अपना इम्युनिटी ठीक रखना होगा |

पौस्टिक भोजन प्रचुर मात्रा में प्रोटीन विटामिन्स इत्यादि खाने से इम्युनिटी रोग प्रतिरोधी छमता बढ़ती है |

साबुन पानी से बार बार हाथ धोना |

संक्रमित व्यक्ति के पास जाने से परहेज अगर जाना हो तब पुरे सावधानी से मास्क ग्लव्स पहनकर जाना चाहिए |

चमगादड़ और पशुओं खास कर सुअरों से दूरी बना कर  रखें | 

पशुओं के ऊतकों रक्त मांस मूत्र लार इत्यादि से यथा संभव दुरी रखें एवं सावधानी से निपटारा करना |

संक्रमित खाद्यपदार्थ एवं पेय को नस्ट करना |

जमीन पर गिरे फल एवं अन्य खाद्य सामग्री को नस्ट करना |

निपाह वायरस के खतरे

इस निपाह वायरस के संक्रमण कितना खतरनाक है इसका पता इस बात से चलता है की इसके  संक्रमण से ४०– ७५ प्रतिशत लोगों की मौत हो जाती है जबकि कोरोना १९ के संक्रमण से ४ से -५ प्रतिशत लोगों की मौत होती है | हालांकि मृत्यु दर इलाज एवं रोग प्रतिरोध छमता पर निर्भर करता है |

इस के खतरनाक रूप को देखते हुए विश्व स्वास्थ संगठन  ने इस बीमारी के इलाज हेतु दबा के खोज और इसके वैक्सीन के निर्माण को प्राथिमिकता दी है | 

Hashtags : Healthy life # Wellness # Wellbeing #  Protection #Selfcare #  Health care # Social science # Positivity # WHO #  Bats # Domestic animals|  

आंतरिक स्रोत : https://knowledge-festival.blogspot.com/2022/01/

https://knowledge-festival.blogspot.com/2022/01/gurug.html

बाहरी स्रोत WWW.Who.int>….Detail Nipah virus

अस्वीकरण: यह लेख जनता में जागरुकता लाने एवं जानकारी हेतु लिखा गया है | इसके उपयोग के सारी जिम्मेदारी उपयोग कर्ता की होगी| 

इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार विभिन्न लेखों]संचार माध्यमों से लिए गए है और सभी सूचनाएँ मूल रुप से प्रस्तुत की गईं है व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार नहीं हैं | तथा इसके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है|